आगरालीक्स…। देवप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी से सभी सभी शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। शालिग्राम-तुलसी विवाह, खाटू श्यामजी प्राकट्य दिवस के साथ भीष्म पंचक व्रत शुरू होगा।
कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र ,हर्षण योग ,वव करण के शुभ संयोग में 14 नवंबर को ही देव प्रबोधिनी देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी देवोत्थान का तात्पर्य देवो को निद्रा से उठाना (जगाना) है शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयन के लिए जाते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठते हैं इन दिनो जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में सोए हुए होते हैं जिन्हें महिलाएं माताएं बहने पूजा पाठ करके जगाती हैं चार महा सोने के पश्चात इस दिन ही जगह के पालनहार श्री हरि विष्णु और सभी देवी देवता शयन से उठते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक भगवान विष्णु के स्वरुप शालिग्राम और माता तुलसी के मिलन का पर्व तुलसी विवाह हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन तुलसी शालिग्राम विवाह कराया जाएगा।
देवप्रबोधिनी एकादशी के ही दिन
खाटू-श्यामजी का प्राकट्य दिवस
खाटूश्यामजी बाबा का प्राकट्य हुआ था। र्बरीक को आज हम खाटू के श्याम, कलयुग के अवतार, श्याम सरकार, तीन बाणधारी, शीश के दानी, खाटू नरेश व अन्य अनगिनत नामों से जानते व मानते हैं।
‘भीष्म पंचक’ व्रत भी शुरू होगा
पुराणों तथा हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में ‘भीष्म पंचक’ व्रत का विशेष महत्त्व कहा गया है। यह व्रत कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी से आरंभ होता है तथा पूर्णिमा तक चलता है। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्त्व दिया गया है। अतः कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से प्रसिद्ध हुआ।
प्रबोधिनी एकादशी पारण
-15 नबम्बर 2021 को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय =प्रातः 06:41 से 08:51
-पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय = 16 नवम्बर 2021सुबह 08:01तक
-एकादशी तिथि प्रारम्भ = 14/नवम्बर/2021 रविवार को प्रातः05:48 बजे
-एकादशी तिथि समाप्त = 16/नवम्वर 2021 को सुबह 08:01 बजे तक