आगरालीक्स…यमुना एक्सप्रेस वे पर जीरो विजिबिलिटी पर भी स्पीड में दौड़ रहे वाहन. आज 13 लोगों की मौत ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर पर खड़े किए प्रश्नचिन्ह
जब एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे के कारण दृश्यता शून्य या अत्यंत सीमित हो जाती है और फिर भी भारी वाहन, ट्रक एवं बसें तेज गति से चलती रहती हैं, तो दुर्घटनाओं की संभावना स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। बीती रात घटित घटनाएँ अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक हैं, जिन्होंने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। यह उल्लेखनीय है कि यह कोई एकाकी घटना नहीं है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 से 2023 के मध्य केवल घने कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेसवे पर 338 सड़क दुर्घटनाएँ घटित हुईं, जिनमें 75 लोगों की मृत्यु हुई तथा 665 से अधिक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए। शीतकाल में कोहरे के कारण एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाएँ होना अब एक नियमित और चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है।मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 राज्य सरकार को यह वैधानिक अधिकार प्रदान करती है कि वह सार्वजनिक सुरक्षा, सुविधा एवं जनहित को दृष्टिगत रखते हुए किसी भी सड़क या सड़क के किसी भाग पर मोटर वाहनों के आवागमन को नियंत्रित, विनियमित अथवा अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर सके। कल रात्रि लगभग 03ः30 बजे, अत्यधिक घने कोहरे के कारण शून्य के निकट दृश्यता की स्थिति में एक्सप्रेसवे पर कई वाहनों की आपसी टक्कर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई, जिसमें एक बस में आग लग जाने से कुछ लोगों की मृत्यु हो गई। यह घटना न केवल अत्यंत पीड़ादायक है, बल्कि त्वरित एवं प्रभावी निवारक उपायों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों के पेटर्न को समझना सड़क सुरक्षा के लिये जरूरी है।
सर्दियों में यमुना एक्सप्रेसवे एवं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे उच्च-गति मार्गों पर अचानक और गंभीर रूप से दृश्यता घट जाती है, विशेषकर रात्रि एवं प्रातःकाल के समय, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में, धारा 115 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त विवेकाधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए, यह अत्यंत उपयोगी एवं जीवन-रक्षक होगा कि शून्य या अत्यंत कम दृश्यता की स्थिति में एक्सप्रेसवे पर वाहनों के आवागमन को अस्थायी रूप से नियंत्रित अथवा प्रतिबंधित किया जाए तथा दृश्यता सुरक्षित स्तर पर पहुँचने के पश्चात ही यातायात को पुनः सामान्य किया जाए। इस प्रकार की पूर्व-नियोजित एवं परिस्थितिजन्य व्यवस्था से न केवल बहुमूल्य मानव जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी, बल्कि सड़क उपयोगकर्ताओं में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना भी सुदृढ़ होगी।इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा एक्टिविस्ट के.सी. जैन ने कहा कि वह शीघ्र ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, जिससे शून्य दृश्यता की स्थिति में वाहनों के आवागमन के संबंध में एक समान एवं वैज्ञानिक मानक व्यवस्था देशव्यापी स्तर पर विकसित की जा सके। यह कदम वर्तमान समय में इसलिए भी अत्यंत आवश्यक हो गया है क्योंकि देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क तथा वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।